Hamara Beej

Tuesday, January 26, 2010

रमेश के सामने ही बीटी बैगन को लेकर घोर विरोध


आनंद बाज़ार पत्रिका, कोलकाता, १४ जनवरी २०१० 

रमेश के सामने ही बीटी बैगन को लेकर घोर विरोध
जीन बदलकर व्यापार हेतू बैगन की खेती को लेकर घोर विरोध की बात पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश खुद सुनकर गए.
बुधवार को विज्ञानं मंदिर में आयोजित बैठक में किसान, वैज्ञानिक, राजनेता और चिकित्सकों की बैठक में पर्यावरण एवं वन मंत्री ने कहा की केंद्र ने बीटी बैगन की खेती के बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. कोलकाता जैसे ही अन्य छ: और शहरों के लोगों की राय जानने के बाद ही इस विषय में फरवरी के मध्य में कोई फैसला किया जायेगा.

बीटी बैगन की खेती को लेकर रमेश नें मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्जी से भी चर्चाएं की.

रमेश ने कहा की सात शहरों के लोगों की राय जानने के बाद ही बीटी बैगन की खेती को मंजूरी दी जायेगी या नहीं इसको घोषणा की जायेगी या इसके लिए और वैज्ञानिक परिक्षण की जरुरत है.

बीटी बैगन को लेकर बोलने के लिए बैठक में सौ से अधिक लोग इकठ्ठा हुए थे. बैठक में देरी से पहुँचने के कारण लोगों से माफ़ी मांगते हुए रमेश नें कहा की आप बंगला में भी बोल सकते हैं. मुझे बंगला बोलना आता है. बहुत अच्छी तरह से नहीं आती है लेकिन मैं समझ सकता हूँ.

बीटी बैगन की खेतीको जेनेटिक इंजीनियरिंग कमिटी से मंजूरी मिलने के बावजूद मंत्रीजी आम आदमियों की राय जानना चाहते हैं. इस बैठक में यह ही हुआ. अधिकाँश वैज्ञानिक आंध्र प्रदेश और तमिलनादू से आये थे.

मंत्री जी के साथ इस बैठक में बहुत सारे किसान भी शामिल थे. उत्तर २४ परगना के किसान नारायन चंद्र बाचार नें जानकारी दी की जिसलिए किसानों को बीटी बैगन की खेती के लिए धकेला जा रहा है उस किट को जैविक कीटनाशक से ही मार डाला जा सकता है. उन्होंने बताया की हमलोग अभी बैगन का बीज खुद ही रख सकते हैं. लेकिन बीटी बैगन आने से खेती के खर्च काफी बढ़ जायेंगे जिसके बाद हम खेती करने लायक नहीं रह जायेंगे. हमलोगों को पता नहीं है की बीटी बैगन उबलेगा की नहीं या इसे जलाया जा सकेगा या नहीं या इस बैगन के शरीर पर गाय और बकरियों जैसी बिमारी लग जायेगी.


बीटी बैगन के पक्ष में भी कई वक्तायों नें बैठक में चर्चा की. बैठक में हिस्सा लेने आये नदिया के किसान जलालुद्दीन एवं २४ परगना से आये सुजुद्दीन मंडल ने कहा की बीटी बैगन की खेती से अगर हमें फायदा होता है तो हम बीटी बैगन की ही खेती करेंगे. इससे पर्यावरण या स्वस्थ्य को नुक्सान पहुंचेगा या नहीं यह देखना हमारा काम नहीं हैं. यह वैज्ञानिकों का काम हैं.
बाद में इन किसानों से बातचीत के बाद पता चला की उत्तर २४ परगना के बीटी खेती का पक्ष लेने वाली मोहिको कम्पनी नें इन्हीं किसानों के बलबूते पर बीटी खेती को बढ़ावा देने के लिए मुहीम छेडा था.

बाज़ार में बीटी बैगन के आने से बीजों पर किसानो का नियंत्रण खत्म हो जाएगा यह आशंका एक वैज्ञानिक और राज्य के कृषि कमीशन के सदस्य तरुण कुमार बसु नें जाहिर की.

विशेषज्ञों की एक कमिटी ने रिपोर्ट दी है की जहाँ बीटी बैगन की खेती की जायेगी उसके ३० मीटर के भीतर अन्य किसी फसल को नहीं उगाया जा सकेगा. इसलिए ३० मीटर की जमीन को खाली छोडना होगा.

बंगीय विज्ञानं परिषद की ओर से अरुणभ मिश्रा नें किसानों के मौलिक अधिकार के बारे में प्रश्न करते हुए कहा की बीटी बैगन की खेती शुरू होने से किसान आपने चयन के अधिकार खो देगा.

वैज्ञानिक मुरारी यादव ने बताया की इस राज्य के अधिकाँश किसान गरीब हैं और प्रांतीय हैं. ये लोग सस्ते दाम पर ही खेती चाहते हैं. जीन बदलकर की जानेवाली खेती पर बहुत अधिक खर्च बैठता है जो उनके पहुँच से बाहर है. आंध्र प्रदेश के रुई की खेती करने वाले किसानों की ओर देखने से इस बात को अच्छी तरह से समझा जा सकता हैं.

राज्य के कृषि कमीशन के चेयरमन तथा युवा कृषि वैज्ञानिक रविंद्रनाथ बसु नें जयराम रमेश को यह बता दिया की कमीशन के रिपोर्ट में हमनेंसाफ़ तरीके से यह स्पष्ट कर दिया है की बीटी फसल के उपज के लिए जमीन का परिक्षण या इसकी व्यापारिक खेती पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

जीएम्-फ्री बिहार के प्रतिनिधि पंकज भूषण ने जयराम रमेश को स्पष्ट रूप से कहा की बीटी बैगन की खेती को मंजूरी देने के लिए आपलोग तैयार हैं लेकिन ऐसी क्या बाध्यता है कि आपको इसे मंजूरी देनी ही है.

इसके बाद बीटी बैगन की खेती का विरोध करने वाले किसानों के समक्ष जयराम रमेश नें १५ मिनट का भाषण भी दिया.


Thursday, January 7, 2010

Bihar says no to Bt brinjal

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NEW DELHI, January 7, 2010



Bihar has become the first State to reject the commercial cultivation of genetically modified or Bt brinjal, if only temporarily.
Bihar Chief Minister Nitish Kumar has said the issue was carefully considered by the Rajya Kisan Ayog, which, after deliberations with farmers, agricultural scientists and agricultural officers was of the opinion that there should be an adequate number of trials to see its performance in different agro-climatic conditions in the State. Such trials should be held involving agricultural research institutions in the State, the Ayog said in its report.
In a letter to the Minister of State (Independent charge) Environment and Forests, Jairam Ramesh, the Bihar Chief Minister said the Ayog also noted that no data was provided on the commercial aspect of cultivation of Bt brinjal, which was important from the point of view of farmers who are mostly small and marginal farmers. “The Ayog is therefore not in favour introduction of Bt brinjal in the State at this point. The recommendations of the Rajya Kisan Ayog have been considered and fully endorsed by the government,” Mr. Kumar said. Bihar accounts for 11 per cent of brinjal cultivation in the country.
Earlier, Mr. Ramesh sought opinions from the six brinjal-producing States on the issue including West Bengal that produces 30 per cent of brinjal, Orissa accounting for 20 per cent, Maharashtra and Andhra Pradesh (six per cent each) and Karnataka 4 per cent.
The Minister’s letters to these States were ahead of the public consultations beginning January 13. The Minister has also written to 50 scientists involved in genetic engineering, biotechnology and agriculture in the U.S., UK, France, Australia and India. Opinion has also been sought from the Ministry of Health, Department of Biotechnology and the Indian Council of Agricultural Research.

Wednesday, January 6, 2010

बीटी बैगन परार्मश बैठक में भाग लेने जायेगी टीम


Jan 06, 12:00 am

मुजफ्फरपुर। 13 जनवरी से कोलकता में शुरू होने वाले बीटी बैगन से संबंधित राष्ट्रव्यापी परार्मश बैठक में भाग लेने के लिए जिले से जिले से 12 सदस्यीय टीम कोलकता जायेगी। टीम में शामिल सुरेश गुप्ता, विजय कुमार सिंह, अजय कुमार सिंह, राजेंद्र राय, पंकज भूषण, डा. आरके सिंह, डा. रामाधार, डा. राम पदमदेव, प्रकाश बब्लू के अलावा जहानाबाद जिले के दो कृषक की टीम 12 जनवरी को कोलकता के लिए रवाना होगी। जीएम मुक्त बिहार अभियान के संयोजक पंकज भूषण ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा बीटी बैगन के संबंध में लिये जाने वाले अंतिम निर्णय के पूर्व राष्ट्रव्यापी परार्मश बैठक का आयोजन किया है। देश के सात स्थानों, कोलकता, भूवनेश्वर, अहमदाबाद, हैदराबाद, बंगलौर, नागपुर व चंडीगढ़ में आयोजित की गयी है।